Friday, 10 February 2012

बेटी को भी जीने का अधिकार

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पहल : बेटी को भी जीने का अधिकार, नहीं करेंगे लिंग जांच 
49 में से 13 ने भरा शपथ पत्र, जिले के बाद राज्य में भी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों को जोड़ा जाएगा मुहिम से 

बेटी बचाने के लिए जिले में अनोखी पहल शुरू हुई है। अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालकों ने बेटी बचाने के लिए शपथ पत्र भरा है। अभी तक 49 में से 13 अल्ट्रासाउंड संचालक आगे आए हैं। प्रशासन का कहना है कि जब केंद्र संचालक लिंग जांच नहीं करेंगे तो बेटी संख्या में जरूर इजाफा होगा। इसी को ध्यान में रखकर रेडक्रास ने यह पहल शुरू की है। जिले के बाद स्थानीय प्रशासन राज्य में इससे लागू करने की अपील करेगा। गर्भ में पल रही लाडो को बचाने का बीड़ा अब किसी सामाजिक कार्यकर्ता ने नहीं, बल्कि शहर के उन अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने उठाया है, जिन पर समाज और प्रशासन दोनों की नजरें होती हैं। शहर के 13अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों ने स्वेच्छा से संकल्प पत्र भरकर प्रशासन को सौंपा है, जिसमें बेटियों को बचाने और महिलाओं को सम्मान देने की बात कही गई है।

रंग ला रही मुहिम : डीसी अशोक सांगवान का कहना है कि रेडक्रास सोसायटी द्वारा कन्या भू्रण हत्या रोकने के लिए शुरू की गई कवायद अब प्रत्यक्ष रूप से रंग लाने लगी है। इसी का नतीजा है कि अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक लिंग जांच नहीं करने का शपथ पत्र भर रहे हैं। उनका दावा है कि यदि अल्ट्रासाउंड संचालकों ने ईमानदारी से अपनी शपथ निभाई तो इस वर्ष की लड़कों की संख्या बढ़ जाएगी। रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर कहना है कि जिले से शुरू की गई इस मुहिम को राज्य के सभी जिलों तक ले जाया जाएगा, जिससे की राज्यभर में बेटी बचाओ अभियान की कवायद में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों को भी शामिल किया जा सके। 

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