आचार्य रामानुज से एक युवक ने कहा - मैं परमात्मा को पाना चाहता हूं , मेरा मार्गदर्शन करें। आचार्य रामानुज ने हंसकर पूछा - प्यारे युवक। इसके पहले कि मैं तुम्हारा मार्गदर्शन करूं बताओ कि क्या तुमने कभी किसी से प्रेम किया है ? युवक ने कहा - महाराज , आप कैसी बातें कह रहे हैं। मैंने आज तक किसी की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा। मैं बड़ा सीधा - सादा हूं , बचपन से धार्मिक संस्कार हैं। मैं तो परमात्मा को पाना चाहता हूं। मैं और युवकों जैसा नहीं हूं।
आचार्य रामानुज ने फिर पूछा - फिर से देखो बीते हए दिनों को और ठीक से याद कर बताओ कि क्या तुमने कभी किसी से प्रेम किया है ? उस युवक ने कुछ क्षण सोचा और फिर निश्चयपूर्वक कहा - नहीं , मैं दावे के साथ कहता हूं कि मैंने कभी किसी से प्रेम नहीं किया। आचार्य निराश होकर बोले - तब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता क्योंकि जिसने कभी संसार में किसी से प्रेम नहीं किया वह परमात्मा से क्या खाक प्रेम कर पाएगा ? तेरे भीतर यदि प्रेम की चिंगारी कहीं होती तो मैं उसे आग में बदल सकता था। हालांकि तेरे जवाब पर मुझे विश्वास नहीं है। क्योंकि यदि जीवन में तुमने किसी से प्रेम न किया होता तो आज जी न रहा होता। अभी तक तेरा जो जीवन चल रहा है वही इस बात का प्रमाण है कि कभी न कभी किसी से तूने प्रेम किया होगा। प्रेम ऐसी चीज है जो बांटने से बढ़ती और देने से मिलती है। मांगो मत , पाओ और पाने के लिए लुटाना होगा। युवक आचार्य का आशय समझ गया।
आचार्य रामानुज ने फिर पूछा - फिर से देखो बीते हए दिनों को और ठीक से याद कर बताओ कि क्या तुमने कभी किसी से प्रेम किया है ? उस युवक ने कुछ क्षण सोचा और फिर निश्चयपूर्वक कहा - नहीं , मैं दावे के साथ कहता हूं कि मैंने कभी किसी से प्रेम नहीं किया। आचार्य निराश होकर बोले - तब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता क्योंकि जिसने कभी संसार में किसी से प्रेम नहीं किया वह परमात्मा से क्या खाक प्रेम कर पाएगा ? तेरे भीतर यदि प्रेम की चिंगारी कहीं होती तो मैं उसे आग में बदल सकता था। हालांकि तेरे जवाब पर मुझे विश्वास नहीं है। क्योंकि यदि जीवन में तुमने किसी से प्रेम न किया होता तो आज जी न रहा होता। अभी तक तेरा जो जीवन चल रहा है वही इस बात का प्रमाण है कि कभी न कभी किसी से तूने प्रेम किया होगा। प्रेम ऐसी चीज है जो बांटने से बढ़ती और देने से मिलती है। मांगो मत , पाओ और पाने के लिए लुटाना होगा। युवक आचार्य का आशय समझ गया।
